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21 जून को है सूर्य ग्रहण,क्या करें-क्या न करें?

आषाढ अमावस, रविवार यह कंकणाकृति सूर्य ग्रहण 21 जून 2020 की प्रात:काल 9.15.58 से 03.04 तक रहेगा। यह कंकण सूर्य ग्रहण रविवार के दिन दिखाई दे रहा है। अत: इसे 'चूडामणि सूर्य ग्रहण' कहा जाता है। शास्त्रों में इस ग्रहण में स्नान, दान, जाप, पाठ, पूजा आदि का बहुत महातम्य माना जाता है।

ग्रहण का सूतक: इस ग्रहण का सूतक 20 जून 2020 ई. की रात्रि लगभग 9.16 से प्रारम्भ हो जायेगा।

ग्रहण के समय क्या करें-क्या न करें?

जब ग्रहण का प्रारम्भ हो रहा हो, तो उस समय से पहले ही स्नान-जप-संकल्प कर लें, मध्यकाल में होम, देवपूजा, पाठ और ग्रहण का मोक्ष समीप होने पर दान पूर्ण होने पर पुन: स्नान करना चाहिए।

पूजा-पाठ क्या करें:-

सूर्य ग्रहण काल में भगवान सूर्य उपासना, आदित्य हृदय-स्त्रोत, सूर्याष्टक स्त्रोक, विष्णु सहस्त्र नाम एवं अपने गुरूमंत्र के साथ गायत्री-मंत्र पढना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल में सब्जी काटने, शयन करने, बाहर निकलने का परहेज करना चाहिए। ग्रहण काल में धार्मिक ग्रन्थ का पाठ करना चाहिए। एक पानी वाला नारियल अपने पास में रखे जब ग्रहण काल समाप्त हो जाये तब नारियल चलते जल में प्रवाह करायें।

कुण्डली में ग्रहण योग

जिन जातकों की कुण्डली में सूर्य राहु या सूर्य केतू की युति है तो उन जातकों को उपरोक्त सूर्य नारायण की पूजा करके चलते जल 'नदी' में सात अनाज, काला कपडा, काले तिल, जौं, नारियल का प्रवाह करना चाहिए। छाज का प्रयोग बहुत ही लाभकारी सिद्ध होता है।

1. सूर्य गायत्री अवश्य पढें:-

ओम आदित्याय विदमहे सहस्रकिरणाय धीमहि, तन्न: सूर्य: प्रचोदयात्।

2. सवितृ प्रार्थना:-

ओम विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परासुव। यद् भद्रं तन्न आ सुव।।

इन्हीं मंत्रों से आप हवन भी कर सकते हैं।

यह ग्रहण मृगशिर तथा आद्रा नक्षत्र एवं मिथुन राशि में घटित होगा। अत: एवं इस राशि/नक्षत्र वालों को ग्रहण-दान, पाठ, आदित्य हृदय स्त्रोत, सूर्याष्टक स्त्रोत, गायत्री मंत्र, महामृत्युज्जय मंत्र का पाठ विशेष रूप से करना चाहिए।

ग्रहण काल में पूजा पाठ व दान आदि से समस्त संकट/कष्ट/क्लेश दूर होकर जीवन में उन्नति मिलनी है।

-संजय सक्सेना, ज्योर्तिविद्

शिवालिक ज्योतिष केन्द्र

मुजफ्फरनगर। मो. 98374 00222

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