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धर्म-दर्शन

  • मोक्षदायक है केदार तीर्थ की यात्रा.

    बारह ज्योर्तिलिंगों में श्रेष्ठ केदारलिंग/केदारनाथ में साक्षात शिव निवास करते हैं। सम्पूर्ण पापों का नाश कर मोक्षदायिनीकेदार भूमि के वर्णन से धर्मशास्त्रा भरे पड़े हैं। शिव पुराण, पद्म पुराण, कर्म पुराण, स्कन्द पुराण, वाराह पुराण, सौर पुराण, वामन पुराण, ब्रह्म वैवर्त पुराण तथा लिंग पुराण आदि में...

  • धर्म-गणेश, तुलसी और दूर्वा,,क्या है इनका महत्व..!

    क्यों नहीं चढ़ती तुलसी:- ब्रह्मकल्प की बात है। नवयौवनसम्पन्न परम लावण्यवती तुलसी देवी भगवान नारायण का स्मरण करती हुई तीर्थों में भ्रमण कर रही थी। इस प्रकार वे पतित पावनी श्री गंगाजी के पावनतम तट पर पहुंची। वहां तुलसी देवी ने अत्यंत सुन्दर श्री गणेशजी को तप करते हुए देखा। सर्वथा निष्काम एवं...

  • पर्यटन: मानस-यात्रा है पर्यटन

    ऐतरेय ब्राह्मण में लिखा है: कलि: शयानो भवति, संजिहानस्तु द्वापर:। उत्तिश्ठन् त्रोता भवति, कृत्त संपद्धते चरन्।। चरैवेति, चरैवेति। अर्थात् जब मनुष्य सोया रहता है, वह कलियुग में होता है। जब वह बैठ जाता है, तब द्वापर में होता है, जब उठ खड़ा होता है तब त्रेतायुग में तथा जब चलने लगता है वह सतयुग को...

  • देवबंद के प्राचीन एवं विख्यात श्री राधा वल्लभ जी मंदिर में आज मोर-मोरनी का एक जोडा मोर मुकुटधारी भगवान श्री ठाकुर जी के दर्शन करने पहुंचा

    देवबंद (गौरव सिंघल)। देवबंद के बहुत प्राचीन एवं विख्यात श्री राधा वल्लभ जी मंदिर में आज मोर-मोरनी का एक जोडा मोर मुकुटधारी भगवान श्री ठाकुर जी के दर्शन करने को पहुंच गया। देशभर में लाॅक-डाउन के चलते मंदिर में श्रद्धालुओ का आना-जाना तो पूरी तरह से बंद है। ऐसे में अचानक मोर-मोरनी के जोडे को मंदिर...

  • बुद्ध पूर्णिमा पर होंगे साल के अंतिम सुपरमून के दीदार, 30 फीसदी ज्यादा चमकदार दिखेगा चांद

    भोपाल। लॉकडाउन के बीच इस साल बुधवार, 07 मई को पूरा देश बुद्ध पूर्णिमा मनायेगा। वैशाख माह की यह पूर्णिमा खगोल विज्ञान की दृष्टि से भी खास होगी, क्योंकि इस दिन शाम को आसमान में साल का अंतिम सुपरमून के दीदार होंगे। बुद्ध पूर्णिमा का चांद बेहद ही खास होगा। पृथ्वी से इसकी दूरी तीन लाख 61 हजार 184...

  • मंदिरों में इसलिए चढ़ाए जाते हैं नारियल और नींबू

    आदिकाल से ही दुनिया के लगभग सभी धर्मों में बलि देने की प्रथा मौजूद रही है। हालांकि ईश्वर भाव का भूखा होता हैं। आजतक किसी ने भगवान कभी किसी वस्तु का उपभोग करते हुए नही देखा है। भारत में भी कई जगहों पर देवी -देवताओं को जानवरों की बलि दी जाती रही है। परन्तु क्या आप जानते हैं कि बलि क्यों दी जाती हैं?...

  • मथुरा:गर्मी से ठाकुरजी को निजात दिलाने अक्षय तृतीया से सजेगा 'लाला' का फूल बंगला

    मथुरा। उत्तर प्रदेश में कान्हानगरी मथुरा के वृंदावन में गर्मी से ठाकुरजी को निजात दिलाने के लिये 26 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर सप्त देवालयों में फूल बंगला बनाने की शुरूआत हो जायेगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस पावन दिवस पर विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। ऐसा माना जाता है ...

  • श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूरी करती हैं मां ताराचंडी

    सासाराम - बिहार में रोहतास जिले के सासाराम स्थित मां ताराचंडी के मंदिर में पूजा करने वालू श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूर्ण होती है। सासाराम से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर कैमूर पहाड़ी की गुफा में मां ताराचंडी का मंदिर है। इस मंदिर के आस-पास पहाड़, झरने एवं अन्य जल स्रोत हैं। यह मंदिर भारत के प्रमुख...

  • थावे दुर्गा मंदिर में श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं होती हैं पूरी

    गोपालगंज - बिहार में गोपालगंज जिले के थावे दुर्गा मंदिर में सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। गोपालगंज के सुप्रसिद्ध थावे दुर्गा मंदिर दो तरफ से जंगलों से घिरा है और इस मंदिर का गर्भगृह काफी पुराना है। इस मंदिर में नेपाल, उत्तर प्रदेश, बिहार के कई जिले से...

  • चंडिका मंदिर में मां सती के नेत्र की होती है पूजा

    मुंगेर- बिहार के मुंगेर जिले के प्रसिद्ध मां चंडिका मंदिर में मां सती के एक नेत्र की पूजा की जाती है और श्रद्धालुओं को नेत्र संबंधी विकार से मुक्ति मिलती है। मुंगेर जिला मुख्यालय से लगभग दो किलोमीटर पूरब गंगा किनारे पहाड़ी गुफा में अवस्थित मां चंडिका का मंदिर लाखों भक्तों के लिए 'आस्था' का केन्द्र ...

  • महावीर मंदिर में रामभक्त हनुमान की हैं युग्म प्रतिमाएं

    देश में अग्रणी हनुमान मन्दिरों में से एक पटना के महावीर मंदिर को मनोकामना मंदिर माना जाता है, जहां हनुमान जी की युग्म प्रतिमाएं हैं। पटना रेलवे स्टेशन के निकट स्थित महावीर मन्दिर देश में अग्रणी हनुमान मन्दिरों में से एक है। इस मंदिर की ख्याति देश-विदेश में मनोकामना मन्दिर के रूप में है, जहां...

  • पर्यटन/ तीर्थस्थल: कलियुग का पवित्र धाम है जगन्नाथपुरी

    हिंदू धर्म की पौराणिक मान्यताओं में चारों धामों को एक युग का प्रतीक माना जाता है। इसी प्रकार कलियुग का पवित्र धाम जगन्नाथ पुरी माना गया है। यह भारत के पूर्व में उड़ीसा राज्य में स्थित है जिसका पुरातन नाम पुरुषोत्तम पुरी, नीलांचल, शंख और श्रीक्षेत्र भी है। उड़ीसा या उत्कल क्षेत्र के प्रमुख देव भगवान...

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