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बाल कथा: एक था राजा

बाल कथा: एक था राजा

एक राजा को कहानियां सुनने का बहुत शौक था। वह लोगों को बुलाते और कहानियां सुनते। राजा को इतनी कहानियां याद थीं कि कभी कोई पुरानी कहानी सुनाता तो वे उसे टोक देते। कई बार वे खुद भी कहानी पूरी कर देते। इस तरह राजा किसी की कहानी से संतुष्ट नहीं होते।

एक बार राजा ने नगर में घोषणा करवा दी कि जो कोई राजा को सबसे लंबी कहानी सुना कर हंसा देगा, उसे खूब इनाम मिलेगा। राजा के बारे में जानने के कारण कोई भी आदमी उन्हें कहानी सुनाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।

एक दिन एक लड़का राजा के पास आया और बोला, 'मैं आपको सबसे लंबी कहानी सुनाऊंगा। आपको हंसाऊंगा भी।'

राजा ने उस लड़के को कहानी शुरू करने को कहा। लड़का कहानी कहने लगा, 'एक समय की बात है। एक आदमी था। वह बहुत खाता था। इतना कि कोई उसका पेट नहीं भर सकता था। उस देश के राजा ने उस खादू के बारे में सुना तो उसे बुलावा भेजा। राजा ने अपने आदमियों को हजारों बर्तनों में खाना तैयार करने को कहा। जब खाना तैयार हो गया तो उस खादू ने भोजन को खाना शुरू किया। वह खाता गया, खाता गया, खाता गया, खाता गया, खाता गया, खाता गया.........।'

'फिर क्या हुआ?' राजा ने पूछा।

लड़के ने जवाब दिया, 'अभी तो उसने पहला ही बर्तन खत्म किया है राजा जी। इसके बाद दूसरा बर्तन वह खाने लगा। खाता गया, खाता गया, खाता गया, खाता गया ........।'

'ठीक है, ठीक है। अब यह कहानी बंद करो, सुबह आ कर फिर से सुनाना।' राजा ने आदेश दिया।

लड़का चला गया। अगले दिन फिर लड़का राजा के पास गया। राजा ने पूछा, 'हां, तुम अपनी अधूरी कहानी को पूरा करो। तुम कल क्या कह रहे थे?'

'मैं उस आदमी के खाने की बात कर रहा था, राजा जी। वह खाता गया, खाता गया, खाता गया, खाता गया........।' लड़के ने कहा।

राजा लड़के की बात पर हंसने लगे। उन्होंने कहा, 'बहुत अच्छा लड़के। तुम्हारी कहानी दुनियां की सबसे लंबी कहानी है। अब तुम इसे बंद कर दो।'

लड़के ने कहानी बंद कर दी। राजा ने उसे बहुत सारा इनाम दिया। इनाम ले कर वह ऊंट पर चढ़ गया और 'खाता गया, खाता गया, खाता गया.......' कहता वहां से चला गया।

- नरेंद्र देवांगन

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