Top

Read latest updates about "बाल जगत" - Page 1

  • बाल कथा: तुम भी ऐसे बनना

    दो बच्चे जो आपस में भाई-बहन थे, छुट्टी के दिन किसी पार्क में दौड़-पकड़ का खेल रहे थे। लड़की तेजी से आगे भाग रही थी, लड़का उसे पकडऩे के लिए पीछे दौड़ रहा था। लड़की दौड़ते हुए पीछे मुड़-मुड़कर देखी जा रही थी। तभी अचानक लड़की वह सामने से आती हुए एक बालिका से टकरा गई। बालिका के सिर पर काली-काली जामुनों...

  • बाल कथा: प्रस्थान

    आशीष का बैंगलुरू में वायु सेना के एक पद के लिए इंटरव्यू था। वह दिल्ली जा कर 27 तारीख का के.के.एक्सप्रेस का आरक्षण करा लाया था। दो दिन पहले जब वह बैग तैयार करने लगा तो उसकी दादी ने कहा, 'परसों तो पड़वा है। पड़वा को कहीं शुभ काम के लिए नहीं जाते। यह तू ने क्या किया?' आशीष बोला, 'दादी, अब पड़वा आदि...

  • बच्चों के लिए अलग कमरा भी जरूरी है

    आपके कमरे की तरह बच्चों के कमरे भी अलग होने चाहिएं। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो बच्चे अपना अलग कमरा पा कर उसे अपनी इच्छानुरूप सजाते हैं। बच्चों का निजी कमरा उनके व्यक्तित्व में कई सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। उनके स्वास्थ्य, उनके व्यक्तित्व, उनकी पसंद उनके कमरे से ही झलकने लगती है। माता...

  • बाल कथा: एक था राजा

    एक राजा को कहानियां सुनने का बहुत शौक था। वह लोगों को बुलाते और कहानियां सुनते। राजा को इतनी कहानियां याद थीं कि कभी कोई पुरानी कहानी सुनाता तो वे उसे टोक देते। कई बार वे खुद भी कहानी पूरी कर देते। इस तरह राजा किसी की कहानी से संतुष्ट नहीं होते। एक बार राजा ने नगर में घोषणा करवा दी कि जो कोई राजा...

  • बाल कथा: रोबोट से शरारत

    श्रेयांश बहुत शरारती लड़का था। उसकी शरारतों से उसके मम्मी-पापा बहुत परेशान रहते थे। श्रेयांश के पापा वैज्ञानिक थे। वह एक ऐसा रोबोट बनाने में जुटे थे, जो लोगों से बात कर सके और जिसमें मनुष्य की ही तरह भावनाएं हों। श्रेयांश देखता, पापा अपनी प्रयोगशाला में लैपटॉप के कीबोर्ड पर बटन दबाते हुए रोबोट से...

  • बाल कथा: गरीब-अमीर

    एक अमीर बहुत गुस्सैल स्वभाव का था। एक बार एक भिखारी उसके दरवाजे पर आया और फरियाद करने लगा, 'बाबा, बहुत गरीब हूं। कुछ तरस खाओ।' भिखारी के मुंह से बार-बार यह सुनकर अमीर नाराज हो गया। भिखारी बोला, 'नाराज क्यों होते हैं ? आज मुझे भीख मांगनी पड़ रही है। हो सकता है कल आपके पास भी यह दौलत न रहे।' यह...

  • बाल जगत: यूं पड़ा था पटना का नाम पाटलिपुत्र

    राजा पुत्रक ने अपना वचन पूरा करने के लिए अपने राज्य को सदा-सदा के लिए खो दिया और स्वयं जंगल में जाकर शरण ले ली। एक दिन अचानक उनकी मुलाकात एक पेड़ के नीचे प्रेत से हो गयी। प्रेत की पत्नी राजा के सरल व दयालु हृदय से इतनी प्रभावित हो गई कि उसने राजा से खुश होकर उसे एक जादुई छड़ी व एक जोड़ी चमकीली...

  • बाल जगत: कौवा चालाक व नीच ही नहीं, उदार भी!

    सर्वत्र मिलने वाले काले-स्याह या हल्के-भूरे रंग के कौवों से भला कौन परिचित न होगा? संस्कृत में इन्हें काग, काक तथा वायस भी कहते हैं। कौवे सड़ी-गली वस्तुएं, मांस और अन्न आदि का भोजन करते हैं, इसलिए इन्हें नीच माना जाता है। श्राद्ध-पक्ष में हिन्दू लोग इन्हें अवश्य ही ताजा भोजन देते हैं। कहते हैं,...

  • प्लास्टिक की बंदूक

    पारूल, परिधि और तूलिका तीनों सहेलियां नूतन शिशु मंदिर में पढ़ती थीं। एक दिन वे मुहल्ले में मनोरंजन भवन के पास 'चोर-सिपाही' खेल रही थीं। परिधि को सिपाही बनने का बहुत शौक था। वह अपनी प्लास्टिक की बंदूक को लेकर सिपाही बन गई। पारूल और तूलिका चोर बन गईं। परिधि ने पारूल से कहा, 'तुम दोनों छिप जाओ। मैं...

  • चिड़चिड़ापन-व्यक्तित्व पर प्रहार

    किसी भी व्यक्ति का कुशल एवं बैलैंस्ड व्यवहार-उसके सुन्दर एवं संतुलित जीवन का दर्पण होता है। ऐसा व्यक्ति अपने इष्ट मित्रों, बन्धु-बांधवों में, श्रेष्ठ एवं प्रतिष्ठित माना जाता है। कहा भी गया है कि हमें दूसरों से वैसा व्यवहार कदापि नहीं करना चाहिए जैसा हम स्वयं के साथ-पसन्द नहीं करते। अच्छी व्यवहार...

  • बोध कथा: परिवार में सौहार्द का रहस्य

    सत्रहवीं शताब्दी में जापान में ओ-चो-सान नाम का व्यक्ति राज्यमंत्री के पद पर था। वृद्धावस्था प्राप्त करने के पश्चात् वह सेवामुक्त हो चुका था। ओ-चो-सान के परिवार में लगभग एक हज़ार सदस्य थे। यह विशाल परिवार अपने सौहार्द के लिये पूरे जापान में मशहूर था। परिवार के सारे सदस्य एकता की डोर में बंधे हुए थे।...

  • बच्चों के व्यवहार से सीखें

    अक्सर हम बड़े बच्चों को छोटा है, नादान है, नासमझ है, इत्यादि वाक्यों से संबोधित कर उनके दैनिक क्रि या कलापों को अनेदखा कर देते हैं जबकि उनकी नटखट, शरारतों में छिपा रहता है कुछ ऐसा व्यवहार जिनसे हम काफी कुछ सीख सकते हैं। बच्चों का हमेशा हंसता, मुस्कुराता, तनावरहित भोला-भाला, मासूम, सौम्य सलोना,...

Share it
Top