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बाल जगत - Page 1

  • बाल कथा: उल्लू गाथा

    हमारे देश में उल्लू को लक्ष्मी वाहन कहा जाता है और प्राय: उल्लू को मूर्ख भी कहते हैं। क्या कारण है लक्ष्मी वाहन को मूर्ख की उपाधि दे दी गई है। सूर्य के प्रकाश में उल्लू को कुछ नजर नहीं आता, वह प्रकाश सहन नहीं कर सकता। इससे स्पष्ट है कि जो लोग धन के पद में उन्मत हो जाते हैं उनमें ज्ञान, बुद्धि की कमी ...

  • बाल कथा: कंजूस का नारियल

    श्रीमान् कंजूस-मक्खीचूस को एक नारियल खरीदना था। दुकानदार ने कीमत बताई दो रूपये। बोले-बहुत महंगा है। अगली दुकान पर तो डेढ़ रूपये में मिलता है। दुकानदार बोला-वहीं से ले लो। दूसरे दुकानदार ने कहा-मैं तो डेढ़ रूपये से कम नहीं लूंगा। सस्ता चाहिये तो अगली दुकान पर जाओ। वह तीसरी दुकान पर पहुंचा। उसने...

  • बाल जगत/जानकारी: हमारे अद्भुत प्राचीन अस्त्र-शस्त्र

    आज एक से बढ़कर एक तीव्र मारक अस्त्र-शस्त्र मौजूद हैं। अमेरिका विश्व का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश है। सबसे अधिक मारक क्षमता वाले हथियार बनाने में अमेरिका अग्रणी है। उसके ग्राहकों में भारत, पाकिस्तान सहित लगभग पूरा एशिया है। दुनिया के अन्य हिस्सों में भी अमेरिका के बनाए हथियार पसंद किये जाते हैं।...

  • बाल कथा: अंतिम परीक्षा

    नगर के बाहर जंगल में गुरूदेव का आश्रम था। अनेक छात्र वहां रहकर शिक्षा ग्रहण करते थे। छात्रों की शिक्षा का आखिरी दिन था। शिक्षा पूरी करके सभी छात्र खुशी खुशी अपने घरों को लौटने के उत्सुक थे। सभी ने अपने वस्त्र और अन्य सामान पोटली में बांधकर रख छोड़ा था। बस गुरूदेव की आज्ञा की प्रतीक्षा थी। दिन...

  • व्यर्थ वस्तुओं के अनेक उपयोग

    क्या आप जानते हैं कि जो वस्तुएं आप व्यर्थ समझ कर फेंक देते हैं, उनका भी कितना प्रयोग हो सकता है? इसलिए रूकिए, कुछ जानकारी हम आपको देते हैं जिससे आप इनका सही इस्तेमाल कर सकते हैं। जब आप नींबू पानी बनाते हैं या सब्जी तथा सलाद में नींबू निचोड़ कर डालते हैं तो आप यकीनन इसका छिलका फेंक देते हैं। ऐसा न...

  • बाल कथा: सच्चा तलवारबाज

    समीर नाम का एक छोटा लड़का था। उसे तरह-तरह की युद्ध कलाएं सीखने का बहुत शौक था। उसने एक योद्धा का बहुत नाम सुना था। लोग कहते थे कि उनके जैसा तलवार चलाने वाला आज तक नहीं हुआ। समीर के मन में इच्छा हुई कि उनके पास जाकर तलवार चलाने की शिक्षा ली जाए। वह उस शहर की ओर चल पड़ा जहां वे रहते थे। समीर ने...

  • बाल जगत: विभिन्न व्हेल मछलियां

    व्हेल मछलियां वर्ग मैमेलिया, उपवर्ग थीरिया, निम्नवर्ग यूथीरिया के आर्डर सिटेसिया के अंतर्गत आती है। व्हेल मछली समुद्र की सबसे बड़ी मछली है। ये रूपांतरित स्तनी हैं। इनके शरीर में विशेष अंग पाये जाते हैं। स्तनीय प्राणी के बहुत से लक्षण इनमें पाये जाते हैं जैसे-अत: तापी व्यवस्था, फेफड़ों द्वारा हवा से...

  • बाल कथा: जैसा बोओगे, वैसा पाओगे

    एक अत्यंत ईमानदार व्यापारी, जब वृद्ध हो गया तो उसने अपना कार्यभार किसी उत्तराधिकारी को सौंपना चाहा। उसने अपने व्यवस्थापकों, निर्देशकों या बच्चों में से चुनने की बजाय एक अलग ही ढंग से सोचा। उसने अपनी कंपनी के सभी युवा कार्यकर्ताओं की एक सभा बुलाई और कहा कि 'अब मैं अपना पद छोडऩा और आप लोगों में से...

  • बाल कथा: तुम भी ऐसे बनना

    दो बच्चे जो आपस में भाई-बहन थे, छुट्टी के दिन किसी पार्क में दौड़-पकड़ का खेल रहे थे। लड़की तेजी से आगे भाग रही थी, लड़का उसे पकडऩे के लिए पीछे दौड़ रहा था। लड़की दौड़ते हुए पीछे मुड़-मुड़कर देखी जा रही थी। तभी अचानक लड़की वह सामने से आती हुए एक बालिका से टकरा गई। बालिका के सिर पर काली-काली जामुनों...

  • बाल कथा: प्रस्थान

    आशीष का बैंगलुरू में वायु सेना के एक पद के लिए इंटरव्यू था। वह दिल्ली जा कर 27 तारीख का के.के.एक्सप्रेस का आरक्षण करा लाया था। दो दिन पहले जब वह बैग तैयार करने लगा तो उसकी दादी ने कहा, 'परसों तो पड़वा है। पड़वा को कहीं शुभ काम के लिए नहीं जाते। यह तू ने क्या किया?' आशीष बोला, 'दादी, अब पड़वा आदि...

  • बच्चों के लिए अलग कमरा भी जरूरी है

    आपके कमरे की तरह बच्चों के कमरे भी अलग होने चाहिएं। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो बच्चे अपना अलग कमरा पा कर उसे अपनी इच्छानुरूप सजाते हैं। बच्चों का निजी कमरा उनके व्यक्तित्व में कई सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। उनके स्वास्थ्य, उनके व्यक्तित्व, उनकी पसंद उनके कमरे से ही झलकने लगती है। माता...

  • बाल कथा: एक था राजा

    एक राजा को कहानियां सुनने का बहुत शौक था। वह लोगों को बुलाते और कहानियां सुनते। राजा को इतनी कहानियां याद थीं कि कभी कोई पुरानी कहानी सुनाता तो वे उसे टोक देते। कई बार वे खुद भी कहानी पूरी कर देते। इस तरह राजा किसी की कहानी से संतुष्ट नहीं होते। एक बार राजा ने नगर में घोषणा करवा दी कि जो कोई राजा...

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