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गणित की गणना और ग्रहों का खेल

गणित की गणना और ग्रहों का खेल

शिक्षा ग्रहण करते समय सबसे बड़ी समस्या यह आती है कि कौन से विषयों का चयन किया जाए? कौन से विषय ऐसे है कि जिन विषयों का अध्ययन कर वह जीवन में सफलता हासिल कर सकता है? किसी भी व्यक्ति के करियर की मंजिल शिक्षा विषयों के चयन के मार्ग से होकर ही जाती है।

दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद आगे कौन से विषयों को लेकर आगे शिक्षा जारी रखनी होगी। यही वह स्टेज है जब भविष्य के करियर की प्लानिंग की जाती है। ग्यारहवीं कक्षा में जिन भी विषयों का चयन किया जाता है उसके अनुसार ही व्यक्ति का करियर निर्धारित होता है।

शिक्षा के इस स्तर पर विद्यार्थी अपनी रुचि, योग्यता और क्षमता के अनुसार अध्ययन के विषय चुनता है। कला विषय, वाणिज्य और साईंस विषयों में से किसी का चयन यहां करना होता है। कई बार इस स्तर पर विद्यार्थी को अपने करियर में सलाह की जरुरत भी महसूस होती है।

अनेक बार यह देखने में आया है कि विद्यार्थी ग्यारहवीं कक्षा में जिन विषयों को लेकर पढ़ाई करता है, परन्तु वह किसी ओर क्षेत्र में कार्य कर रहा होता है।

इस प्रकार की स्थितियों से बचने में ज्योतिष विद्या एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अपनी जन्मपत्री का अध्ययन किसी योग्य ज्योतिषी से करा कर, अपने करियर से जुड़े विषयों को जाना जा सकता है।

यह किस प्रकार संभव है, आज इस आलेख में हम आपको यही बताने जा रहे हैं, कि ऐसे कौन से ज्योतिषीय योग है जो व्यक्ति को गणित विषय का जानकार बनाते हैं-

ज्योतिष विद्या से शिक्षा विषयों का चयन करने के लिए निम्न ग्रह अनुसार विषय तालिका उपयोगी साबित हो सकती है –

तालिका एक के तहत विभिन्न ग्रहों द्वारा इंगित शिक्षा

ग्रह

सूर्य – गैर तकनीकी -राजनीति विज्ञान

अर्ध-तकनीकी – सांख्यिकी। उच्च गणित।

तकनीकी प्रभाव

अंक शास्त्र

भौतिक विज्ञान

मुल-आयुर्वेदिक खगोल विज्ञान

मेडिसिन

चंद्र गैर तकनीकी – फाइन आर्ट्स।

अर्ध-तकनीकी – मानविकी। संगीत। नृत्य, पैरामेडिक्स

तकनीकी प्रभाव- केमिस्ट्री। चिकित्सा। फार्मेसी। जैव रसायन। पर्यावरण विज्ञान

मंगल ग्रह गैर तकनीकी – कानून। तर्क संबंधी। भूमि

अर्ध-तकनीकी – विज्ञान। मैकेनिक

तकनीकी प्रभाव- अभियांत्रिकी। यांत्रिक कार्य

बुध गैर तकनीकी – ज्योतिष, पत्रकारिता।

अर्ध-तकनीकी – पब्लिक रिलेशन। एकाउंटेंसी

तकनीकी प्रभाव- उच्च लेखा

बृहस्पति गैर तकनीकी – इतिहास, संस्कृत, शास्त्रीय साहित्य

अर्ध-तकनीकी – प्रबंधन, वाणिज्य, वित्त, बैंकिंग, दर्शन, मनोविज्ञान

अर्ध-तकनीकी – जीव विज्ञान, केतु के साथ मिलकर जूलॉजी, जैव प्रौद्योगिकी। प्रबंधन। कानून

शुक्र – गैर तकनीकी – ललित कला। मानविकी। संगीत। नृत्य चित्र। नागरिक सास्त्र

अर्ध-तकनीकी – होटल प्रबंधन फैशन डिजाइनिंग आर्किटेक्चर पर्यटन फोटोग्राफी

अर्ध-तकनीकी – मूला (वनस्पति। बागवानी) और कृषि)। कंप्यूटर ग्राफिक्स & एनीमेशन।

शनि ग्रह गैर तकनीकी – इतिहास। भूगोल कानून। स्तुति विद्या। पुरातत्त्व

अर्ध-तकनीकी – यांत्रिक काम

अर्ध-तकनीकी – अभियांत्रिकी भूगर्भशास्त्र

राहु गैर तकनीकी – अनुसंधान कार्य। मनोविज्ञान

अर्ध-तकनीकी – वैमानिकी

अर्ध-तकनीकी – पायलट। एयर होस्टेस। एयरोस्पेस / एरोनॉटिका इंजीनियरिंग / पर्यावरण विज्ञान

केतु गैर तकनीकी – भाषा

अर्ध-तकनीकी – भाषा

अर्ध-तकनीकी – मौसम विज्ञान। कंप्यूटर भाषा /प्रोग्रामिंग। कीटाणु-विज्ञान बृहस्पति के साथ मिलकर।

शिक्षा विषय निर्धारण में आवश्यक तत्व –

• जन्म लग्न से पंचम भाव का स्वामी जिस नक्षत्र में स्थित हो, और उस पर जिन ग्रहों का प्रभाव हो उनका अध्ययन किया जाता है।

• पंचम भाव पर ग्रह प्रभाव

• बुध पर ग्रहों का प्रभाव

• उपरोक्त सभी प्रभावों को मिलाकर शिक्षा क्षेत्र का निर्धारण किया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त नवमांश चार्ट, चतुर्विंशांश चार्ट का अध्ययन तभी करें, जब जन्म समय सौ प्रतिशत शुद्ध हो।

गणित विषय का चयन और ग्रह

गणित ऐसी विद्याओं का समूह है जो संख्याओं, मात्राओं, परिमाणों, रूपों और उनके आपसी रिश्तों, गुण, स्वभाव इत्यादि का अध्ययन करती हैं। गणित एक अमूर्त या निराकार और निगमनात्मक प्रणाली है। गणित की कई शाखाएँ हैं : अंकगणित, रेखागणित, त्रिकोणमिति, सांख्यिकी, बीजगणित, कलन, इत्यादि। गणित में अभ्यस्त व्यक्ति या खोज करने वाले वैज्ञानिक को गणितज्ञ कहते हैं।

उदाहरण कुंड्ली – 1

14 अप्रैल 1973, 01:18:00 घंटे (1S1), लखनऊ (भारत)

कुंडली विश्लेषण

मकर लग्न और सिंह राशि की कुंडली में पंचमेश शुक्र, चतुर्थ भाव में उच्चस्थ सूर्य के साथ स्थित है। यहां पंचमेश शुक्र केतु के नक्षत्र में है और मंगल की राशि में तथा उच्चस्थ मंगल से दृष्ट है। शिक्षा भाव पर लग्नेश शनि की स्थिति है।

शिक्षा कारक गुरु नीचस्थ अवस्था में लग्न भाव में आयेश मंगल के साथ है। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि शुक्र सूर्य से अस्त है और वर्गोत्तम भी है। पंचम भाव और पंचमेश दोनों तकनीकी ग्रहों के प्रभाव में है।

जिसमें मंगल, शनि, केतु, गुरु शामिल है। बुध से पंचम भाव में कर्क राशि है, जिस पर शनि, मंगल, गुरु का प्रभाव है। बुध से पंचम भाव के स्वामी चंद्र है, जो अष्टम भाव में सूर्य की राशि और शुक्र के नक्षत्र में स्थित है। चंद्र भी वर्गोत्तम है।

नवमांश कुंडली

नवमांश कुंडली में पंचम भाव पर गुरु स्थित है। यहां भी पंचमेश गुरु ही है, और एक बार फिर से चतुर्थ भाव में उच्चस्थ सूर्य के साथ मंगल की राशि में स्थित है और शनि से दृष्ट है। इस प्रकार पंचमेश शुक्र सूर्य, मंगल और शनि जैसे तकनीकी ग्रहों के प्रभाव में है। विद्या प्राप्ति की समयावधि में जातिका को सूर्य की महादशा प्राप्त हुई। जन्मकुंडली में सूर्य वर्गोत्तम है, और पंचमेश के साथ है।

स्नातक शिक्षा में इन्होंने राजनीति विग्यान आनर्स विषय के साथ प्रवेश लिया। दशा थी, सूर्य/मंगल/शुक्र और आगे की शिक्षा भी राजनीति विग्यान के साथ की। इस समय दशा थी, सूर्य/बुध/सूर्य। इस कुंडली में पंचमेश शुक्र पर सूर्य का प्रभाव अधिक है, सूर्य उच्चस्थ, वर्गोत्तम स्थिति में है, इसलिए यहां जातिका की शिक्षा का क्षेत्र सूर्य से अधिक प्रभावित रहा। शिक्षा प्राप्ति के समय दशा भी सूर्य की ही प्राप्त हुई, इसलिए यह सोने पर सुहागा वाली स्थिति बन गई।

इस जातिका ने स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर टाप किया। सूर्य के बाद इन्हें चंद्र की महादशा मिली। कुंडली में चंद्र सप्तमेश है, अत: इनका विवाह हो गया और ये अपनी वैवाहिक जीवन में व्यस्त हो गई।

उदाहरण कुंड्ली – 2

26 अगस्त 1970, 11:32 इटावा उ प्र, भारत

26 अगस्त को जन्म लेने वाले इस जातक ने राहु महादशा में बारहवीं की शिक्षा प्राप्त की। इन्होंने बी एस सी विग्यान (गणित आनर्स) के साथ प्रवेश लिया। उस समय गुरु/गुरु/शनि की दशा थी। अंतर्द्शानाथ गुरु वक्री अवस्था में है।

विग्यान विषय के साथ पढ़ाई करने में इनकी रुचि 1988 में लगभग समाप्त हो गई। इन्होंने साईंस धारा छॊड़कर आर्टस विषय के साथ एक बार फिर से पढ़ाई शुरु की। इस बार इनके विषय थे, अंग्रेजी, हिन्दी, इकानामिक्स और गणित। विग्यान विषय तो इन्होंने छॊड़े परन्तु गणित विषय को बनाए रखा। 1992 में इन्होंने इन विषयों के साथ स्नातक की शिक्षा पूरी की।

कुंडली विश्लेषण

जन्म कुंड्ली में राहु पंचम भाव में शनि की कुम्भ राशि और अपने नक्षत्र में स्थित है। राहु पर लग्नस्थ गुरु की पंचम दृष्टि है। इसके अतिरिक्त पंचम भाव को स्वराशिस्थ सूर्य, केतु और मंगल की दृष्टि आने से कई प्रभाव शिक्षा भाव पर आ रहे है। उच्चस्थ शनि मंगल की मेष राशि में है और सूर्य के नक्षत्र में है। बुध उच्चस्थ है और यह भी सूर्य के नक्षत्र में स्थित है। शनि एक बार फिर से बुध से पंचमेश है।

नवमांश कुंडली

पंचम भाव मंगल के द्वारा दॄष्ट है। पंचमेश शुक्र उच्चस्थ बुध के साथ है। बुध और शुक्र दोनों सूर्य की राशि में स्थित है, एवं गुरु के दॄष्टि संबंध में है। नवमांश में पंचमेश शुक्र पर सूर्य के प्रभाव ने इन्हें गणित विषय से जोड़े रखा।

इसके अतिरिक्त गणित और गणना विषय के लिए केतु का विचार भी किया जाता है। जन्मकुंडली में पंचम भाव पर केतु की भी दृष्टि है, नवमांश कुंडली में भी केतु लग्न भाव में स्थित हो, पंचम भाव को प्रभावित कर रहा है। इसी के फलस्वरुप बी ए विषय के साथ इन्होंने गणित विषय की पढ़ाई की।

आईये अब दशा की भूमिका देखते हैं- महादशानाथ गुरु है। गुरु लग्न भाव में स्थित है, और राहु द्वारा दृष्ट है। पंचमेश शनि की दशमेश चंद्र पर तीसरी दृष्टि है। शुभ गुरु की दशा अवधि के प्रभाव ने आर्टस विषय पढ़ने के अवसर दिए। जैसा की ऊपर तालिका में बताया गया है कि केतु भाषा ग्यान के साथ साथ गणना करने की योग्यता भी देता है।

इस जातक ने सरकारी सेवा क्षेत्र में 1992 को कलर्क पद से अपना करियर शुरु किया। वह भी बी ए स्नातक का परीक्षा परिणाम आने से पूर्व। इस समय गुरु की दशा थी, इसके पश्चात इन्हें जूनियर अकांटेंट और इसके बाद अकाउंटेंट का पद भी प्राप्त किया। दशमेश चंद्र पर गुरु का प्रभाव देखा जा सकता है। जो इन्हें अकाउंटेंट के पद तक लेकर गया।

नवमांश कुंडली में गुरु दशमेश है और सप्तम भाव में स्थित है। दशमांश कुंड्ली में भी गुरु दशमेश्फ़ है और सप्तम भाव में स्थित होकर बुध से दृष्ट है। बुध का गुरु पर प्रभाव और गुरु का दशमेश होना, इन्हें अकाउंटेंटस में लेकर गया। यह एक ऐसे व्यक्ति की कुंडली है जिसने साईंस से पढ़ाई शुरु की, आर्ट्स विषय के साथ गणित पढ़ा और वाणिज्य क्षेत्र के अकाउंटेंटस में नौकरी की।

उदाहरण ३

10 मार्च, 1951, 22:30, हूगली, कलकत्ता

इस जातक ने 1967 में बी एस सी स्नातक शिक्षा भौतिक, रसायन शास्त्र और गणित विषय के साथ पूरी की। 1969 में एम एस सी शिक्षा गणित विषय के साथ पूरी की और फरवरी 1973 को इन्होंने सरकारी नौकरी प्राप्त कर ली थी। जन्मपत्री में पंचम भाव पर उच्चस्थ शुक्र और लग्नेश मंगल की युति है।

पंचम भाव को सप्तम दॄष्टि से वक्री शनि प्रभावित कर रहे है। शनि सूर्य के नक्षत्र में है। पंचमेश गुरु चतुर्थ भाव में शनि की वायुतत्व राशि कुम्भ में है। यहां चतुर्थेश गुरु सूर्य, बुध, राहु की युति में है, और गुरु पाप ग्रहों के साथ होने के कारण पीडित है

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव

8178677715, 9811598848

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