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धर्म -अध्यात्म - Page 1

  • पर्यटन/ तीर्थस्थल: कलियुग का पवित्र धाम है जगन्नाथपुरी

    हिंदू धर्म की पौराणिक मान्यताओं में चारों धामों को एक युग का प्रतीक माना जाता है। इसी प्रकार कलियुग का पवित्र धाम जगन्नाथ पुरी माना गया है। यह भारत के पूर्व में उड़ीसा राज्य में स्थित है जिसका पुरातन नाम पुरुषोत्तम पुरी, नीलांचल, शंख और श्रीक्षेत्र भी है। उड़ीसा या उत्कल क्षेत्र के प्रमुख देव भगवान...

  • ज्योतिष: जन्मदिन का गहरा प्रभाव पड़ता है व्यक्ति के जीवन पर

    जन्म लेने वाले जातक (व्यक्ति) के जीवन पर जन्मदिन का भी प्रभाव पड़ता है। सप्ताह के सातों दिनों का महत्व एवं प्रभाव अलग-अलग होता है। जिस दिन जो व्यक्ति जन्म लेता है, उस दिन का प्रभाव उस व्यक्ति के जीवन पर किस प्रकार पड़ता है, उसका विवरण ज्योतिषीय आधार पर प्रस्तुत है- रविवार को भगवान् सूर्य का दिन...

  • मुज़फ्फरनगर - प्यारे जी महाराज की है बड़ी मान्यता

    मुज़फ्फरनगर। मुज़फ्फरनगर जनपद की बुढ़ाना तहसील के गॉव रायपुर अटेरना जो कि बुढ़ाना से 8 किलो मीटर मेरठ करनाल हाइवे पर पड़ता है। इस छोटे से गॉव में श्री प्यारे जी महाराज का प्राचीन मंदिर है चैत्र मास की छट तिथि को गांव रायपुर में एक बड़ा मेला लगता है। इस अवसर पर आसपास क्षेत्र के अलावा दूसरे शहरों से...

  • पूजा में रखें कुछ खास चीजों का ध्यान

    हमारे धर्म ग्रंथों में देवताओं के पूजन से संबंधित बहुत सी जरूरी बातें बताई गई है। ये बातें बहुत ही महत्त्वपूर्ण हैं। आज हम आपको पूजन से जुड़ी यही कुछ जरूरी बातें बता रहे हैं: ० सूर्य, श्रीगणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु को पंचदेव कहा गया है। सुख की इच्छा रखने वाले हर मनुष्य को प्रतिदिन इन पांचों...

  • हास्य: होली पर आपका भविष्यफल

    हमारे प्रख्यात भविष्यवक्ता पं. अदूरदर्शी शास्त्रीजी ने तबियत से भांग छानकर पाठकों के लिए उनका राशिफल तैयार किया है। पंडित जी का दावा है कि उनकी भविष्यवाणियां शत प्रतिशत सही सिद्ध होंगी क्योंकि भंग की तरंग में अंतरिक्ष यान में सवार होकर उन्होंने ग्रहों-नक्षत्रों की हरकतें देखी हैं। सो आपकी सेवा में...

  • मथुरा के फालैन में होलिका दहन से निकलता है पंडा

    मथुरा - तीन लोक से न्यारी उत्तर प्रदेश की मथुरा नगरी में फालैन गांव की चमत्कारी होली भगवान विष्णु के प्रति प्रहलाद की अटूट भक्ति का हर साल गवाह बनती है। इस गांव की होली से मेथा पंडा 15 बार निकल चुका है। मथुरा से लगभग 55 किलोमीटर दूर और कोसी से लगभग दस किलोमीटर दूर गांव की होली ब्रज की होलियों में...

  • आत्मनिरीक्षण क्यों है जरूरी

    हममें से कितने लोग हैं जो अपने को इम्पू्रव करने के लिए आत्मनिरीक्षण का सहारा लेते हैं या इसकी जरूरत समझते हैं? अक्सर लोग इसी खुशफहमी में रहते हैं कि उनसे अच्छा कोई नहीं। वे जो सोचते हैं करते हैं, बस वही ठीक है। गलत सिर्फ दूसरे ही होते हैं। दरअसल व्यक्ति अपने बारे में जो सोचता है और जो वास्तविकता...

  • ज्योतिष: दुष्कर नहीं है मंगली कन्या का विवाह

    हिन्दू विवाह मात्र स्त्री-पुरूष का साथ रहने का समझौता नहीं है। यह ऋषियों की उच्चतम मानसिक स्थिति से बनाया गया विधान है। विवाह के वैदिक विधान स्त्री-पुरूष के वैवाहिक जीवन को अधिकतम सुखद और मधुर बनाने के लिए सृजित किये गये हैं। इसी हेतु विवाह संबंध में वर कन्या के शारीरिक गुण-दोष, शिक्षा, बुद्धि व ...

  • पर्यटन: प्रकृति का रोमांच-मणिकर्ण

    गर्मियां शुरू होते ही क्या बड़े और क्या बच्चे छुट्टियों की प्रतीक्षा करने लगते हैं। छुट्टियां आरंभ होने से पहले ही योजना बनने लगती है कि इस बार घूमने जाएं भी तो आखिर कहाँ। हम दिल्ली से शिमला घूमने का प्लान बनाकर दिल्ली से कालका तक रेल से पहुँचे लेकिन रास्ते में अनेक लोगों से गर्म होते शिमला की...

  • हमारे तीर्थ स्थल: भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं सिंहवाहिनी सिंहेश्वरी

    माँ भवानी सिंहवाहिनी सिंहेश्वरी और भवानी पति शंकर सिंहेश्वर श्रद्धालुओं का आकर्षक तीर्थ स्थल है। मधेपुरा जिला मुख्यालय से आठ किलोमीटर उत्तर बिहपुर-वीरपुर पथ के किनारे कोसी कछार पर स्थित यह तीर्थ स्थल अपने आप में अत्यंत ही महत्त्व रखने वाला स्थल है। यह ऐतिहासिक, धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से काफी...

  • पूजा में रखें कुछ खास चीजों का ध्यान..

    हमारे धर्म ग्रंथों में देवताओं के पूजन से संबंधित बहुत-सी जरूरी बातें बताई गई है। ये बातें बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। आज हम आपको पूजन से जुड़ी यही कुछ जरूरी बातें बता रहे हैं- सूर्य, श्रीगणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु को पंचदेव कहा गया है। सुख की इच्छा रखने वाले हर मनुष्य को प्रतिदिन इन पांचों देवों की...

  • पर्यटन/धर्मस्थल: श्री दक्षेश्वर महादेव

    दक्ष प्रजापति ने जगत की मर्यादा हेतु अपनी नगरी कनखल में एक बार यज्ञ का महान अनुष्ठान आयोजित किया। जिसमें उन्होंने भगवान शिव तथा उनकी पत्नी जगदम्बा सती को निमन्त्रित नहीं किया। ऐसी स्थिति में माता सती स्वयं यज्ञ स्थल पर जा पहुंची। जहां उनके पिता दक्ष प्रजापति ने न केवल उनका अनादर किया बल्कि उनके पति...

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