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अनमोल वचन

अनमोल वचन

धरती का स्वर्ग यदि कहीं देखने को मिल सकता है तो वह हंसते-खेलते सुखी परिवार में ही देखने को मिल सकता है। यदि नरक कहीं देखने को मिलता है तो वह भी दुखी परिवार में देखने को मिलता है। पारिवारिक जीवन को स्वर्ग के समान आनन्द देने वाली परिस्थितियों में परिवर्तित किया जा सकता है और नरक के समान कष्ट देने वाली परिस्थितियों में भी ढाला जा सकता है। कहते हैं कि घर की लक्ष्मी कही जाने वाली बहु चाहे तो घर में खुशियां ला सकती है और चाहे तो उससे खुशियां छीन सकती हैं। घर के सदस्य अपने आपसी व्यवहार से चाहे तो घर में प्यार और खुशियों की, अपनत्व की गंगा बहा सकते हैं और चाहे तो ईर्ष्या , द्वेष, घृणा का गन्दा नाला बहा सकते हैं। घर की स्वस्थ परम्पराएं, रीति-रिवाज परिवार की शुभता का ध्यान सभी परिजनों को सीखना चाहिए, परन्तु यदि कोई इन बातों को महत्व नहीं देता, अनुशासन को बन्धन कहता है, अच्छे संस्कारों को नहीं अपनाता, परिजनों से अपनेपन का व्यवहार नहीं करता, अपने कर्तव्यों का दायित्व नहीं निभाता, केवल अधिकारों को छीनने की बात करता है, तो ऐसे परिवार में नरक का वास हो जाता है।

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