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अनमोल वचन

अनमोल वचन

अपने बारे में बहुधा आदमी खुशफहमी का शिकार रहता है। वह समझता है कि मेरी विशेषताओं से, मेरे सद्गुणों से दूसरे प्रभावित हैं। मैं कैसा प्रभाव छोड रहा हूं। दूसरे मेरे बारे में क्या सोचते हैं, यह तो दूसरे ही बतला सकते हैं। अपने व्यक्तित्व में जिन सद्गुणों के होने के बारे में आप पूर्णरूप से निश्चित हैं, क्या उनके बारे में आपके सम्बन्धी या पडौसी भी उतने ही सुनिश्चित हैं, जिनकी प्रशंसा पाने के लिए आप आतुर हैं, जिनका दिल आप जीतना चाहते हैं। एक बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि लोगों के मन में जगह बनाने के लिए उदारता और साहिष्णुता दोनों की ही जरूरत होती है और यदि आप में इन दोनों गुणों का अभाव है, तो इन्हें विकसित करने का प्रयास कीजिए। दूसरों की प्रशंसा यदि होती है तो जलिए मत। प्रयास यह कीजिए कि सामान्य परिस्थिति में आप उनसे बेहतर व्यवहार करें, ताकि आप भी वाहवाही बटोर सके। लोगों की मंशाओं पर शक मत करिए कि वे आपको नीचा दिखाने के लिए दूसरे की तारीफ कर रहे हैं, बल्कि सामने वाले के उदार मन की कद्र कीजिए कि उनमें इतना बडप्पन तो है कि दूसरे की प्रशंसा करने में वे कंजूस नहीं है, वह दूसरों की अच्छाईयों की कद्र करना जानता है।

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