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अनमोल वचन

अनमोल वचन

हमारी अनेक कामनाएं होती है, जिनमें से कुछ की पूर्ति हो जाती है और कुछ हमारी पहुंच से बहुत दूर होती है। किसी कामना से पहले हमें यह निश्चित कर लेना चाहिए कि वास्तव में हमारी चाहत है क्या? उसकी कोई उपयोगिता हमारे लिए है भी या नहीं और फिर वह हमारी सीमाओं से बाहर तो नहीं है। ऐसा करने से हमें वास्तविक इच्छाओं और काल्पनिक चाहतों के मध्य अन्तर समझ में आ जायेगा। काल्पनिक चाहतों से मुक्त होना होगा। अहंकार अपेक्षाओं को जन्म देता है। हम जिस भाव को लेकर जीते हैं यदि वह पूरा नहीं होता तो मन उदास हो जाता है। जो करना है स्वयं करना हैं इसके लिए दृढ प्रतिज्ञ हो जाये किसी अन्य के सहयोग की अपेक्षा न करें। आप किसी से अपने समान किसी कार्य के प्रति समर्पण की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए। स्वयं को कमजोर न समझें, अपनी क्षमता को पहचानें। आज समाज, परिवार और हर स्थान पर अपेक्षाओं की भरमार है। मां-बाप, पिता-पुत्र, पति-पत्नी, भाई-बहन, बास अधीनस्थ प्रत्येक को दूसरे से अपेक्षाएं होती हैं। पारिवारिक विघटन इन्हीं अपेक्षाओं की देन है। क्रोध, तनाव, अवसाद, आत्महत्याएं, हीन भावना, आत्मग्लानि, अपेक्षाओं के कारण बढ रहे हैं। इसलिए श्रेयष्कर यहीं है कि अपेक्षाओं की उपेक्षा करनी चाहिए।

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