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अनमोल वचन - Page 2

  • अनमोल वचन

    नैतिक जीवन अर्थात नीति के अनुसार जीवन यापन ऐसा तभी सम्भव है जब मनुष्य अपने अहंकार, स्वार्थ और अनावश्यक भय से मुक्त होकर अपना जीवन निर्मलता से व्यतीत करें। मनुष्य का नैतिक गुण ही सम्पूर्ण मानवता का श्रृंगार है। किसी भी व्यक्ति को सही गलत के मापदण्ड पर परखा जाता है। वे मापदण्ड ही मूल्य कहलाते हैं और...

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    कई अच्छे लोगों के बारे में कहा जाता है कि वे देवता स्वरूप है। प्रश्र उठता है कि देवत्व प्राप्त करने के लिए क्या करना अपेक्षित है। स्पष्ट है जो मानवता का गुण, धर्म है उसी को जगाना होगा, बढाना होगा। पहले सच्चे इंसान बने फिर देवता बनने में देर नहीं लगेगी। यही है मनुष्य का धर्म। धर्म साधना से ...

  • अनमोल वचन

    सत्य सदा एक रूप में स्थिर रहता है। वह कभी भी परिवर्तित नहीं होता, सदैव शाश्वत बना रहता है अर्थात जो अपरिवर्तनशील है, वही सत्य है और वह समस्त देहधारियों में आत्मा के रूप में विद्यमान रहता है। परमात्मा ने सारे ब्रह्मांड को धारण कर रखा है और सारा ब्रह्मांड उसी के भीतर व्याप्त है। वह सभी शरीरों के अन्दर ...

  • अनमोल वचन

    यह सृष्टि बडी अद्भुत है, जिसने इसे बनाया है उसकी महिमा अवर्णनीय है। यहां हर पल कुछ ऐसा घट रहा है जो अकल्पनीय है। कई बार सोचते हैं कि इस सूखे पौधे को निकाल दें, लेकिन आलस्यवश निर्णय टल जाता है और एक सुबह दिखता है कि उसमें कौंपले फूट रही हैं। इसी प्रकार भीड भरी ट्रेन में तिल रखने को जगह नहीं पर विवशता ...

  • अनमोल वचन

    यदि परमात्मा ने किसी को दिया है तो उसे दूसरे की सहायता भी उदारता से करनी चाहिए। मनुष्य में जब देने की प्रवृत्ति जन्म लेती है, तो उसका प्रभामंडल बनता है। जब वह परिवार के लिए उदार होता है तो परिजनों का स्नेह मिलता है। परिवार से निकलकर समाज के प्रति सहयोग और उपकार उसे आदरणीय बनाते हैं। किसी की सहायता...

  • अनमोल वचन

    जीवन और मृत्यु पर किसी का वश नहीं है फिर भी जीवन की इच्छा अदम्य है। लोग अपने-अपने कारणों से जीवन जी रहे हैं। किसी को धन चाहिए, किसी को प्रतिष्ठा, किसी को परिवार। हर कोई लेना चाहता है, देने में किसी को दिलचस्पी नहीं। प्राप्त करने की अभिलाषा इतनी प्रबल होती जाती है कि मनुष्य कुछ भी करने को तैयार हो...

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    भौतिक विज्ञान में छोटी असफलता मिलने पर ही मनुष्य स्वयं को अभागा समझने लगता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वह अभागेपन की वास्तविक परिभाषा से अनभिज्ञ है, जो व्यक्ति नैतिक मूल्यों, दया और परोपकार जैसे गुणों को त्याग कर लोभ, ईष्र्या, क्रोध और अहंकार को अपनाकर अपने सम्पर्क में आने वालों के साथ चालाकीपूर्ण व्यवहार ...

  • अनमोल वचन

    कुछ बनने के लिए, उन्नति करने के लिए सपने लगभग सभी देखते हैं। सपने देखना बुरा नहीं, बुरा तो सपनों को साकार करने के लिए अपेक्षित पुरूषार्थ और प्रयास न करना है। कई बार सपनों के अनुरूप सफलता मिल जाती है, किन्तु कई बार हमारी अपेक्षाएं, हमारे सपने बहुत बडे होते हैं, प्रयासों के बाद भी पूरे नहीं हो पाते,...

  • अनमोल वचन

    हर व्यक्ति के पास एक दिन में 24 घंटे का समय होता है, जिसमें उसे सारे काम सम्पन्न करने होते हैं। हम अपने समय का अधिकाधिक उपयोग कर सके इसके लिए समय प्रबन्धन आवश्यक है। कुछ लोग समय के वर्गीकरण को ही समय प्रबन्धन मानने की भूल करते हैं, परन्तु समय के वर्गीकरण की अपेक्षा समय का सदुपयोग अधिक जरूरी है। यदि...

  • अनमोल वचन

    जीवन का सार यही है कि हमें कर्मशील रहते हुए प्रत्येक क्षण का उपयोग कर उसका आनन्द लेना चाहिए। हमारे सभी सुख-दुख हमारे अन्तर्मन में उपजते हैं। तरह-तरह के विकार हमें लुभाते-डराते रहते हैं, परन्तु जो व्यक्ति स्वयं पर नियंत्रण कर लेता है फिर उसे न कोई भय सताता है और न ही उसके मन में विकार उपरान्त होते...

  • अनमोल वचन

    व्यवहार कुशल होना सफल जीवन का एक सुखद मार्ग है, जो व्यवहार कुशल होता है वह जीवन में कभी असफल नहीं होता। उसे जीवन में पग-पग पर सफलता मिलती रहती है। वह अपने व्यवहार से दूसरों को प्रभावित कर लेता है, जो समय-समय पर उसके लिए सहायक की भूमिका निभाते हैं। यदि आप किसी व्यक्ति विशेष को सफल व्यक्ति मानते हैं,...

  • अनमोल वचन

    कोई व्यक्ति अपनी अच्छाई-बुराई का प्रमाण पत्र लेकर नहीं घूमता, उसका व्यवहार ही उसके व्यक्तित्व का प्रतिबिम्ब है। विश्वविद्यालयों में भले ही शैक्षिक प्रमाण पत्रों की आवश्यकता पडती हो, परन्तु जीवन रूपी विश्वविद्यालयों में व्यवहार ही व्यक्तित्व की सबसे बडी अभिव्यक्ति होती है, जो व्यवहार कुशल नहीं उसे यह ...

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