Top

अनमोल वचन

अनमोल वचन

हमारे जीवन में संस्कारों की आधारशिला हमारे माता-पिता बचपन से ही रख देते हैं फिर उसी दिशा में हमारे व्यक्तित्व का विकास होता है। यद्यपि वर्तमान में अधिकांश माता-पिता अपने बच्चों को महान गजिणतज्ञ, वैज्ञानिक, डाक्टर, इंजीनियर आदि बनने के लिए प्रेरित करते हैं, परन्तु यह बिल्कुल सम्भव नहीं है कि हर बच्चा अपने क्षेत्र में महान बने, परन्तु हम प्रत्येक बच्चे को सत्यवादी, आज्ञाकारी, परोपकारी अवश्य बना सकते हैं। प्रथम गुरू होने के नाते हम माता-पिता को अपने बच्चे को आदर्श बनने की प्रेरणा देनी चाहिए। माता-पिता को अपने बच्चो को पशु-पक्षियों से प्रेम करना, पेड-पौधों की रक्षा करना और अपने से बडों का आदर करने की सीख देनी चाहिए। किसी भी बालक का चरित्र ही उसकी सबसे बडी पूंजी होती है और उसे उसकी जीवन पर्यन्त रक्षा करनी चाहिए। चरित्रवान व्यक्ति ही समाज, राष्ट्र तथा विश्व का सही नेतृत्व और मार्गदर्शन कर सकता है। महापुरूषों ने चरित्र को उसका वास्तविक धन बताया है। चरित्र की पूर्ति धन, यश, नाम, विद्वता आदि में से कोई नहीं कर सकता। स्वामी विवेकानन्द कहते हैं कि यदि किसी बालक में चरित्र निर्माण हो गया तो शेष चीजें स्वयं हो जायेगी।

Share it