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अनमोल वचन

अनमोल वचन

विगत कल से बसंत नवरात्र प्रारम्भ हो चुके हैं। हम जीवन का आनंद तभी ले सकते हैं, जब हमारा शरीर व मन स्वस्थ्य हो और ये स्वस्थ्य तभी रह सकते हैं, जब इनका परिमार्जन तथा परिष्कार हो, जीवन में संयम का पालन हो। संयम का पालन करने से एक और स्वस्थ्य बढता है और दूसरी ओर शक्ति का संचय होता है। इसी कारण नवरात्र का उत्सव शक्ति, आराधना, व्रत अनुष्ठान आदि के साथ जोड़ा गया है, ताकि इन नौ दिनों के अभ्यास के द्वारा हम अपने जीवन में संयम का पालन कर सकें। अपनी उर्जा का सही नियोजन कर सकें। नवरात्र का पर्व प्रकृति का पर्व है। शक्ति आराधना का पर्व है। प्रकृति तथा शक्ति दोनों ही हमारे जीवन के मूल आधार है। इनके बिना जीवन की कल्पना भी संभव नहीं। हमारा शरीर प्रकृति के तत्वों से मिलकर बना है और संचालित भी प्रकृति की शक्ति से ही होता है। इस शरीर से जीवात्मा के अलग हो जाने पर यह शरीर इसी प्रकृति में विलीन हो जाता है। यदि शरीर में प्रकृति के नियमों का पालन हुआ है, तो स्वस्थ्य और दीर्घायु रहेगा अन्यथा शरीर अस्वस्थ्य होकर जीवित रहने योग्य नहीं रह जायेगा।

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