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अनमोल वचन

अनमोल वचन

तैतीयोपनिषद् में माता-पिता की सेवा का बडा महत्व बताया गया है 'तुम माता में देवबुद्धि रखना, पिता में देवबुद्धि रखना, जिसका अर्थ यह है कि माता-पिता को ईश्वर की प्रतिमूर्ति मानकर श्रद्धा और भक्तिपूर्वक उनकी आज्ञा पालन, नमस्कार और सेवा करते रहना ही जीवन का सबसे बडा तप है।' इस सेवा के बदले उनसे कुछ चाहें नहीं, कुछ मांगें नहीं, क्योंकि सन्तान को जो कुछ भी मिलता है, माता-पिता के कारण ही मिलता है। उनसे लिये हुए शरीर, समझ, सामथ्र्य एवं सामग्री के लिये उनकी सेवा करनी है। उनसे मिली वस्तु उन्हें ही देना। सदैव मन में भावना रखो कि उनकी सेवा कैसे की जाये, उन्हें सुख कैसे पहुंचाया जाये, उनको आराम कैसे मिले, उनका कल्याण कैसे हो? हमारे धार्मिक इतिहास में भगवान श्री राम और श्रवण जैसे अनेक उदाहरण हैं, जो हमारे लिये आदर्श हैं। माता-पिता ही हैं, जो सन्तान के भले की ही सोचते हैं, उन्हें आशीर्वाद देते हैं, मंगल कामना करते हैं, सन्तान को सदा सुखी और प्रसन्न देखना चाहते हैं। प्रतिदिन प्रात: माता-पिता के चरण स्पर्श करें, उनका आशीर्वाद लें, उनकी आवश्यकताओं को जानें और उन्हें पूरा करें। माता-पिता की सेवा ईश्वर की पूजा के तुल्य है।

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