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अनमोल वचन

अनमोल वचन

विद्यार्थी के विषय में एक श्लोक का यह अंश शत प्रतिशत सही और सटीक है 'सुखार्थी न कुतो विद्या, विद्यार्थिन कुतो सुखम् अर्थात सुख-भोग चाहने वाले को विद्या कहां और विद्यार्थी को सुख कहां, जो विद्यार्थी जीवन में सुख की कामना करते हैं, वें विद्या से रहित ही रह जाते हैं। इसी संदर्भ में यह भी कहा गया है कि पढना लोहे के चने चबाने के समान है। विद्यार्थी जीवन तो तपश्चर्या का जीवन होता है। इसलिए विषय सुखार्थी विद्या को और विद्यार्थी विषय सुख को छोड दें, त्याग दें। ऐसा किये बिना विद्या की प्राप्ति नहीं हो सकती। विद्या उसी को प्राप्त होती है, जो विद्यार्थी जीवन में सुखों का त्याग कर देता है, आलस्य अर्थात शरीर और बुद्धि में जडता, नशा, मोह अर्थात किसी वस्तु में फंसावट (आसक्ति), चपलता (चंचलता) और इधर-उधर की व्यर्थ कथा करना, सुनना, पढते-पढते रूक जाना, अभिमानी, अत्यागी होना, ये सात दोष विद्यार्थियों में नहीं होने चाहिए, जिनमें ये दोष विद्यमान हैं, उनको विद्या कभी नहीं आती।

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