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अनमोल वचन

अनमोल वचन

कहा गया है कि प्रारब्ध से अधिक और समय से पहले कुछ भी प्राप्त होने वाला नहीं है, फिर भी सपने देखना बन्द न करें, उनसे नाता न तोडें, अन्यथा जीवन नीरस हो जायेगा। परन्तु अपनी आकांक्षाओं को सीमित कर अपनी क्षमताओं की सीमा का अतिक्रमण न होने दें। तात्पर्य यह है कि आपकी आकांक्षाएं आपकी क्षमता, योग्यता और परिस्थिति के दायरे में ही रहनी चाहिए। इस संदर्भ में कहा जाता है कि झोपडी में रहकर महलों के सपने न देखें, अन्यथा दुख और निराशा के अतिरिक्त कुछ हाथ नहीं लगेगा, कुंठा अलग से और पैदा हो जायेगी। कुंठा जीवन की प्रबल शत्रु है। कुंठा से व्यक्ति की उपलब्धियां, गुण और प्रतिभा कमजोर होती है। इसलिए अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक बनाये रखें। संयमित दिनचर्या अपनाकर कुंठा से काफी हद तक बचा जा सकता है। प्रकृति के साथ समय व्यतीत करें। मत भूलो के असफलता, सफलता की जननी है। इसलिए पारस्परिक ईष्र्या और द्वेष से सर्वथा बचते हुए 'हानि-लाभ, जीवन-मरण, यश-अपयश विधि हाथ की उक्ति पर भरोसा रखें और 'हारिये न हिम्मत बिसारये न राम की सारगर्भित युक्ति को हृदयंगम करते हुए, कुंठा को परास्त करने के लिये सतत प्रयत्नशील रहें।

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