Top

अनमोल वचन

अनमोल वचन

मनुष्य के सामने आदिकाल से ही यह सबसे बडा प्रश्न रहा है कि मैं कौन हूं? बहुत से लोग आये और जीवन भोगकर चले गये, किन्तु इस प्रश्न की ओर से बेपरवाह रहे। संसार के मायावी आकर्षण ने उन्हें इतना चकाचौंध कर दिया है कि उन्हें कभी अपने निकट आने और स्वयं को समझने का समय ही नहीं मिला। वें भाग्यवान थे कि जिन्होंने अपने सच को पहचाना और इसे जानकर मोक्ष को प्राप्त हुए। धर्मग्रंथों के अनुसार प्राणी को पंच तत्वों, पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से मिलकर बना हुआ माना जाता हे, जिसका अन्त निश्चित है। ये पांचों तत्व सृष्टि में प्रचुरता से उपलब्ध हैं। जीव की मृत्यु के बाद ये पांचों तत्व अपने-अपने मूल में लौट जाते हैं। मनुष्य जब संसार में अपनी पहचान 'मैं' के रूप में स्थापित करने का प्रयास करता है, तो वह एक भ्रम में जी रहा होता है। इस 'मैं' में उसका कुछ भी नहीं होता, सारा कुछ ग्रहण किया गया है और निश्चित रूप से लौट जाने वाला है। मनुष्य का 'मैं' वास्तव में स्थापित हो ही नहीं सकता। ऐसा इसलिए, क्योंकि उसकी कोई ज्ञात अवधि नहीं है, पलभर में उसका विनाश हो सकता है। आज तक कोई नहीं जान पाया कि उसका जीवन कितने दिनों का है, कितने पलों का है।

Share it
Top