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अनमोल वचन

अनमोल वचन

हम कोई धार्मिक कार्य, पर्व, संस्कार आदि करते हैं तो उसका माध्यम वेद, उपनिषदों के मंत्र होते हैं। यज्ञ भी मंत्रों द्वारा किया जाता है। मंत्र पूर्णत: ध्वनि विज्ञान पर आधारित हैं और ध्वनि के चमत्कारों को विज्ञान मान्यता भी दे चुका है। जिस प्रकार से योग और टेलोपैथी को विज्ञान सम्मत करार दिया गया है, ठीक वैसे ही मंत्र भी विज्ञान सम्मत हैं। मंत्र की वास्तविक परिभाषा है 'मननात जायते इतिमंत्र' अर्थात जिनके मनन से, जपने से जन्म-मृत्यु के चक्कर से छुटकारा मिल जाये, वही मंत्र है। (ध्यान रहे जाप बिना उच्चारण के भी होता है)। इसी प्रकार जिनके उच्चारण से बोलने से हमारे समस्त कार्य पूरे हो जायें, वही मंत्र है। मंत्र ध्वनि विज्ञान का एक परम शक्तिशाली आविष्कार है। मंत्र शब्दों का एक सुन्दर संगठन है, जिसको सुनकर मनुष्य का चित्त शांत होता है और चित्त की शान्ति ही सुख तथा आनन्द का मूल है। शब्दों का संगठन करके हमारे ऋषियों ने हमें एक ऐसा विज्ञान दिया है, जिसने हमें बहुत कुछ करने में समर्थ कर दिया है। अदृश्य शक्तियों में भी मंत्रों के द्वारा स्पन्दन पैदा करके उन्हें अपने अनुकूल किया जा सकता है। मंत्र से सर्व शक्तिमान ईश्वर प्रसन्न होते हैं और प्रसन्नता में वह हमें इच्छित वरदान देते हैं।

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