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  • अनमोल वचन

    महर्षि वेदव्यास जी ने लम्बी तपस्या करने के बाद अनेक ग्रंथ लिखे। ग्रंथों की रचना के पश्चात उन्होंने भगवान से कहा 'न त्वह' कामये राज्यं न स्वर्गम् न च र्पुन भवम् कामये दुखतमानान् प्राणीनाम आर्तिनाशनम्।। अर्थात 'हे परमात्मा मैं आपसी राजपाट की कामना नहीं करता, स्वर्ग भी आपसे नहीं चाहता, मुझे मोक्ष की...

  • अनमोल वचन

    'ओउम् विश्वानि देव सविर्तुदुरितानि परासुव यद भद्र तन्नी आसुव। वेद का ऋषि कहता है कि हे सकल जगत के उत्पत्तिकर्ता प्रभु कृपा करके हमारे समस्त दुर्गुणों, दुव्र्यसनों, दुष्कर्मों, दुखों एवं विघ्न बाधाओं को हमसे दूर कर दीजिए तथा जो कल्याणकारी उत्तम गुण कर्म पदार्थ हैं, उन्हें प्रदान कीजिए। हे जगदीशवर...

  • अनमोल वचन

    संसार का स्वाभाव है हर क्षण गिरगिट की तरह रंग बदलना। उसका यह स्वाभाव छिपा भी नहीं है। नित्य प्रति इसके दृष्टांत देखने और सुनने में आते ही रहते हैं। दूर दृष्टि से देखिये संसार का कण-कण, क्षण-क्षण में परिवर्तित होता हुआ यही संदेश दे रहा है। यत दृष्टतम् तत् नष्टम् अर्थात जो दिख रहा है, वह सब नहीं...

  • अनमोल वचन

    आदमी यदि निर्दयी है तो समझना कि वह धर्म के नाम पर कुछ भी करता है, परन्तु धार्मिक इन्सान नहीं है। वेदों का सार यही है कि मनुष्य को मनुष्य बनना चाहिए और अपनी आत्मा के विपरीत व्यवहार किसी से भी नहीं करना चाहिए। सबसे बडा धर्म यह है कि मनुष्य में दयालुता का गुण होना चाहिए। दूसरे को दुखी देखे तो हृदय में...

  • अनमोल वचन

    आज स्वामी विवेकानन्द जयंती है। वर्ष 1893 में उनके द्वारा शिकागो (अमेरिका) विश्व धर्म परिषद् में व्यक्त उदगार के कुछ अंश उद्यृत किये जा रहे हैं। 'मैं एक ऐसे धर्म का अनुयायी होने में गर्व का अनुभव करता हूं, जिसने संसार को सहिष्णुता की शिक्षा दी है। हम लोग सभी धर्मों में विश्वास रखते हैं, सभी को मानते...

  • अनमोल वचन

    जो परमात्मा के सच्चे भक्त होते हैं, वें परमात्मा से अपने लिये कुछ मांग ही नहीं पाते। जब भी प्रार्थना करने बैठते हैं, तो अधिकांशत: ऐसा होता है कि वे अपने लिये मांग ही नहीं पाते, हमेशा दूसरों के लिये ही मांगते रहते हैं 'हे प्रभु सबके दुख दूर करना, सब सुखी हों। इस लिये हमारी सबसे महत्वपूर्ण प्रार्थना...

  • अनमोल वचन

    जिस प्रकार केवल रोटी-रोटी कहने से पेट की भूख शांत नहीं होती, केवल दौलत का जिक्र करने से कोई अमीर नहीं हो जाता, केवल जल का रटन करने से प्यास नहीं बुझती, उसी प्रकार परमात्मा के केवल नामो के उच्चारण से बात नहीं बनती। बात जब बनती है, जब उसे जान लिया जाता है, परमात्मा का बोध हासिल कर लिया जाता है। आज...

  • अनमोल वचन

    हमारी संस्कृति में 'दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान अर्थात दया को अपनाना ही धर्म का मूल माना गया है और अभिमान को पाप के जनक की संज्ञा दी गई है। हम सभी को इन कल्याणकारी भावनाओं से युक्त होकर संसार की यात्रा करनी चाहिए। यदि सभी मनुष्य इन संदेशों को अंगीकार कर लें और इसी धर्म सम्मत मार्ग पर चलें तो...

  • अनमोल वचन

    कहा गया है कि प्रारब्ध से अधिक और समय से पहले कुछ भी प्राप्त होने वाला नहीं है, फिर भी सपने देखना बन्द न करें, उनसे नाता न तोडें, अन्यथा जीवन नीरस हो जायेगा। परन्तु अपनी आकांक्षाओं को सीमित कर अपनी क्षमताओं की सीमा का अतिक्रमण न होने दें। तात्पर्य यह है कि आपकी आकांक्षाएं आपकी क्षमता, योग्यता और...

  • अनमोल वचन

    स्वप्न देखना मनुष्य की जन्मजात प्रवृत्ति है। प्राय: वह अपनी क्षमता और स्थिति का भलीभांति आंकलन किये बिना ही चंचल मन के वशीभूत होकर विविध आकांक्षाओं अथवा कपोल कल्पित योजनाओं को पूरा करने का स्वप्न देखता रहता है। जब किसी के मन में कुछ पाने की तीव्र उत्कंठा हो, परन्तु उसे प्राप्त करने की शक्ति,...

  • अनमोल वचन

    आदमी की विडम्बना यह है कि वह खुद से ही ठगा जाता है। प्रमाद और अज्ञानता के कारण से मन की मूढता हर चौराहे पर इसलिए टगी जाती है कि वह सत्य को पहचान नहीं सकी। वैज्ञानिक अल्बर्ट आईस्टीन बहुत अद्भुत बात कहते हैं 'जीने के केवल दो ही तरीके हैं, पहला यह मानना कि कोई चमत्कार नहीं होता और दूसरा यह कि हर वस्तु...

  • अनमोल वचन

    इन्सान यथास्थिति में अधिक विश्वास करता है, वह परिवर्तन से भयभीत होता है। कुछ लोगों को जीवन में आने वाले बदलाव डरा देते हैं। ऐसे लोगों की सोच नकारात्मक होती है। उनके मन में इस प्रकार के सवाल चलते रहते हैं कि क्या होगा यदि नौकरी पर आंच आ गई? क्या होगा यदि जीवन साथी छोडकर चला गया? क्या होगा यदि...

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