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अनमोल वचन - Page 1

  • अनमोल वचन

    संस्कृत के एक श्लोक का आश्य है कि चलते रहो, चलते रहो, गुरूदेव रविन्द्रनाथ टैगोर ने एक बंगाली देश भक्ति गीत में कहा था 'एकला चलो रे' जिसका मतलब है आप अपनी मंजिल की ओर अपने ढंग से आगे अकेले बढते रहे। कहा जा सकता है कि जो बैठ जाता है, उसका भाग्य भी बैठ जाता है और जो उठकर चलने लगता है, उसका भाग्य भी...

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    एक विचारक का यह वाक्य अक्षरश: सत्य है, जो मन को नियंत्रित नहीं करते उनके लिए मन शत्रु के समान कार्य करता है। हमारा मन यदि हमारा हो जाये तो सारी समस्याएं ही समाप्त हो जायेगी, क्योंकि उन समस्याओं को हमारा मन ही तो खडा करता है। हम झंझटों से मुक्त हो जायेंगे। मन ही नाचता है, मन ही दौडता है, मन ही असहाय...

  • अनमोल वचन

    विगत कल से बसंत नवरात्र प्रारम्भ हो चुके हैं। हम जीवन का आनंद तभी ले सकते हैं, जब हमारा शरीर व मन स्वस्थ्य हो और ये स्वस्थ्य तभी रह सकते हैं, जब इनका परिमार्जन तथा परिष्कार हो, जीवन में संयम का पालन हो। संयम का पालन करने से एक और स्वस्थ्य बढता है और दूसरी ओर शक्ति का संचय होता है। इसी कारण नवरात्र...

  • अनमोल वचन

    आज नये वर्ष का प्रथम दिवस है। नवसंवतसरोत्सव को अति प्राचीन वैदिक काल से ही महापर्व के रूप में मनाया जाता रहा है। सभी ऋतुओं के एक पूरे चक्र को संवतसर कहा जाता है। किसी ऋतु से आरम्भ करके ठीक उसी ऋतु के पुन: आने तक जितना समय लगता हे, उस काल मान को संवतसर कहा जाता है। ऋतु शब्द का अर्थ है जो सदैव चलती...

  • अनमोल वचन

    किसी कार्य को करते समय आपको उस कार्य पर एकाग्र होना चाहिए। एकाग्रता नहीं रह पायेगी तो कुछ भी कर लें, कार्य पूरा होगा ही नहीं। एकाग्रता के सम्बन्ध में वैसे तो अनेक प्रसंग स्वामी विवेकानन्द के जीवन के मिलेंगे, परन्तु एक मजेदार प्रसंग अमेरिका प्रवास के समय का है। अमेरिका में एक स्थान से गुजरते हुए...

  • अनमोल वचन

    कोई कितना भी स्वयं को धैर्यवान दिखाने का प्रयास करे, परन्तु अपने प्रिय की मृत्यु पर रिश्ता कोई भी हो, बडे से बडे यौद्धा भी टूट जाते हैं, क्योंकि उसके जीवन में अब तक के साथ का विछोह उससे सहन नहीं होता। यह कोई मानवीय दुर्बलता नहीं है, जिसमें संवेदना है, उसमें यह स्वाभाविक है। कस्तूरबा की मृत्यु पर दाह ...

  • अनमोल वचन

    धर्म परमात्मा को किसी विशेष नाम से पुकारने का नाम नहीं है। किसी लिबास या पहनावे का नाम भी नहीं। 'परहित सरस धर्म नहीं, भाई पर पीडा सम नहीं अधमाई। अर्थात दूसरों का हित करने जैसा धर्म नहीं है तथा दूसरों की पीडा देने जैसी नीचता और अधर्म नहीं है। सच्चे धर्म की पालना वह करता है, जो दूसरे की पीडा हरता है,...

  • अनमोल वचन

    जैसे गांधी जी के तीन बन्दरों के विषय में कहा जाता है, न बुरा देखो, न बुरा सुनो, न बुरा बोलो। वैसे ही आप भी अपनी ज्ञानेन्द्रियों का दुरूपयोग न होने दें। यदि हम बुराई को देखेंगे नहीं और बुरा सुनेंगे भी नहीं, तो हमारे भीतर बुराई के संस्कार भी नहीं आ पायेंगे। फिर हम बुरा कहेंगे भी नहीं और बुरा करेंगे...

  • अनमोल वचन

    राम चरित मानस में कहा गया है 'जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन तैसी। अर्थात जिसकी जैसी भावना होती है, वह प्रभु के लिये वैसी ही धारणा रखता है। मनुष्य के कल्याण में मुख्य भूमिका उसके विचारों की ही होती है। कर्म और अनुभवों के द्वारा ही मनुष्य की मनोवृत्ति बनती है। मनोवृत्ति के द्वारा उसके...

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    दया को धर्म का मूल कहा जाता है अर्थात जब तक हृदय में दया है, तब तक धर्म उस पर टिका है, दया की अनुपस्थिति में धर्म का कोई अस्तित्व ही नहीं अर्थात यदि मनुष्य निर्दयी है तो वह धार्मिक नहीं हो सकता। संसार में जितने भी महामानव हुए हैं, सबके जीवन में करूणा की बडी भूमिका रही है। भगवान बुद्ध ने राजपाट छोडकर ...

  • अनमोल वचन

    करूणा का अर्थ किसी शर्त के बिना प्रेम करना है। करूणा अपने और पराये का भेद नहीं करती। करूणा के अभाव में किसी के लिये कुछ करते समय मनुष्य में उपकार की भावना रहती है, परन्तु करूणा के साथ मानव जो कुछ करता है, वह केवल प्रेम के कारण करता है। इसलिए प्रेम और करूणा ही जीवन जीने का सबसे महत्वूपर्ण सूत्र है।...

  • अनमोल वचन

    रिश्ते मन से बनते हैं, खाली बातों से नहीं। भूख रिश्तों की भी होती है, एक बार परोसकर देखिये। परिवार में रहकर रिश्तों से दोस्ती निभानी पडती है। रिश्तों को लगन से पालना पडता है। प्रसन्नता के लिये खुश होकर काम करने की जरूरत है। क्या छोटा, क्या बडा, सबके लिये समान व्यवहार होना चाहिए। तभी तो कोई आपकी...

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