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  • अनमोल वचन

    तीन सत्य जिन्हें सदैव याद रखना चाहिए। हम जो कर्म आत्मा के आदेश के विपरीत मनमर्जी से करते हैं, वें प्राणी कर्म, फल तथा आवागमन के दुखदायी चक्र से बांध देते हैं, यह दृश्यमान संसार के सभी पदार्थ, रिश्ते, इन्द्रियों के भोग, सांसारिक मान बडाई आदि सब नाश्वान हैं। इनमें से किसी को कभी सच्चा और पूर्ण सुख...

  • अनमोल वचन

    तीन सत्य जिन्हें सदैव याद रखना चाहिए। हम जो कर्म आत्मा के आदेश के विपरीत मनमर्जी से करते हैं, वें प्राणी कर्म, फल तथा आवागमन के दुखदायी चक्र से बांध देते हैं, यह दृश्यमान संसार के सभी पदार्थ, रिश्ते, इन्द्रियों के भोग, सांसारिक मान बडाई आदि सब नाश्वान हैं। इनमें से किसी को कभी सच्चा और पूर्ण सुख...

  • अनमोल वचन

    इस संसार में करोडों मानव जन्म लेते हैं, जीते हैं। केवल भारत देश में ही इतनी बडी जनसंख्या है, परन्तु उनमें से कितने हैं, जो अपने इस बहुमूल्य जीवन को वास्तव में मूल्यवान बनाते हैं? कितने हैं जो दूसरों के साथ उसी प्रकार का व्यवहार करते हैं, जैसे व्यवहार की वें स्वयं अपने लिये दूसरों से अपेक्षा करते...

  • अनमोल वचन

    हमारे महान संतों ने मानव को सदैव ईश्वर से प्रेम करने की प्रेरणा दी है। मानव जीवन क्षण भंगुर है। वह कहीं भी, कभी भी समाप्त हो सकता है। यह रेत के उन कणों की भांति है, जो मुट्ठी में पकडने से भी हाथ से सरक जाते हैं। जीवन के जो पल बीत गये, वे तो वापस नहीं आते, इस कारण हर मानव को चाहिए कि वह अपने जीवन को...

  • अनमोल वचन

    कितनी ही बहस कर लें, परन्तु बुजुर्गों के मामले में हमारे यहां हिसाब किताब सबसे अलग है। बुजुर्गों के सम्मान की, बुजुर्गों के अपमान की, हजारों-लाखों और कभी खत्म होने वाली कहानियां हमारे यहां हैं। इनके बारे में यही कहा जा सकता है कि यह तो घर-घर की बात है। दुख की बात है कि हम अपने बुजुर्गों को नजरअंदाज...

  • अनमोल वचन

    'विभस्तकारम् हवामहे वसोश्चित्रस्य राधस: वेद का ऋषि कहता है- हे सर्वरक्षक, सर्व व्यापक, सर्वज्ञ, सर्वाधार स्र्वान्तर्यामी परमात्मा आप समस्त मनुष्यों आदि प्राणियों तथा सूर्य, चन्द्र, पृथ्वी आदि पिंडों को बसाने वाले वसु हैं तथा कर्मानुसार सभी जीवों को फल प्रदान करने वाले हैं। मनुष्य, पशु, कीट, पतंग आदि...

  • अनमोल वचन

    विद्यार्थी के विषय में एक श्लोक का यह अंश शत प्रतिशत सही और सटीक है 'सुखार्थी न कुतो विद्या, विद्यार्थिन कुतो सुखम् अर्थात सुख-भोग चाहने वाले को विद्या कहां और विद्यार्थी को सुख कहां, जो विद्यार्थी जीवन में सुख की कामना करते हैं, वें विद्या से रहित ही रह जाते हैं। इसी संदर्भ में यह भी कहा...

  • अनमोल वचन

    मूर्ख और अज्ञानी कौन? जिसने कोई शास्त्र न पढा हो, न किसी शास्त्र का श्रवण किया हो, जो अहंकारी हो, थोडी सी उपलब्धि में ही फूला न समाता हो, जो सदा ही अपनी प्रशंसा सुनने को उत्सुक रहता हो। जो दरिद्र, अयोग्य और क्षमता रहित होकर भी बडे-बडे मनोरथ करने वाला, बिना पुरूषार्थ के पदार्थों की प्राप्ति की...

  • अनमोल वचन

    जो गूढ विषय को शीघ्र जान ले, बहुत लम्बे समय तक शास्त्रों का अध्ययन करे, सुने, विचारे और जो कुछ जाने, उसे परोपकार में प्रयुक्त करे, अपने स्वार्थ के लिये कोई काम न करे, बिना पूछे और बिना योग्य समय जाने दूसरों को सम्मति न दे, वही पंडित होता है, जो प्राप्ति के अयोग्य की इच्छा कभी न करे। नष्ट हुए...

  • अनमोल वचन

    महर्षि वेदव्यास जी ने लम्बी तपस्या करने के बाद अनेक ग्रंथ लिखे। ग्रंथों की रचना के पश्चात उन्होंने भगवान से कहा 'न त्वह' कामये राज्यं न स्वर्गम् न च र्पुन भवम् कामये दुखतमानान् प्राणीनाम आर्तिनाशनम्।। अर्थात 'हे परमात्मा मैं आपसी राजपाट की कामना नहीं करता, स्वर्ग भी आपसे नहीं चाहता, मुझे मोक्ष की...

  • अनमोल वचन

    'ओउम् विश्वानि देव सविर्तुदुरितानि परासुव यद भद्र तन्नी आसुव। वेद का ऋषि कहता है कि हे सकल जगत के उत्पत्तिकर्ता प्रभु कृपा करके हमारे समस्त दुर्गुणों, दुव्र्यसनों, दुष्कर्मों, दुखों एवं विघ्न बाधाओं को हमसे दूर कर दीजिए तथा जो कल्याणकारी उत्तम गुण कर्म पदार्थ हैं, उन्हें प्रदान कीजिए। हे जगदीशवर...

  • अनमोल वचन

    संसार का स्वाभाव है हर क्षण गिरगिट की तरह रंग बदलना। उसका यह स्वाभाव छिपा भी नहीं है। नित्य प्रति इसके दृष्टांत देखने और सुनने में आते ही रहते हैं। दूर दृष्टि से देखिये संसार का कण-कण, क्षण-क्षण में परिवर्तित होता हुआ यही संदेश दे रहा है। यत दृष्टतम् तत् नष्टम् अर्थात जो दिख रहा है, वह सब नहीं...

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