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स्कूलों की मनमानी के मामले में उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर

स्कूलों की मनमानी के मामले में उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर



नैनीताल- उत्तराखंड के नैनीताल जनपद में निजी स्कूलों की मनमानी तथा शिक्षा के व्यावसायीकरण को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। इस मामले में सेण्ट्रल बोर्ड आफ सेकेण्डरी एजूकेशन (सीबीएसई) को भी पक्षकार बनाया गया है।

उच्च न्यायालय ने हल्द्वानी के छात्र-अभिभावक-अध्यापक कल्याण सोसाइटी (स्टूडेंट, गार्जियन, टीचर वेलफेयर सोसाइटी) दमुवाढूंगा के पत्र पर संज्ञान लेते हुए इस मामले में जनहित याचिका दायर की है। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन तथा न्यायमूर्ति रमेश चंद्र खुल्बे की युगलपीठ में मामले की सुनवाई हुई। सोसाइटी के अध्यक्ष पंकज खत्री की ओर से कहा गया है कि उनकी संस्था छात्र-अभिभावक हितों के लिये लंबे समय से संघर्ष कर रही है।

हल्द्वानी में 70 निजी स्कूल तथा कॉलेज हैं। सभी सीबीएसई से संबद्ध हैं। ये नियमों को ताक पर रखकर मनमानी फीस वसूल कर रहे हैं। मानकों के खिलाफ हर साल फीस में बढ़ोतरी करते जा रहे हैं। यही नहीं इन्होंने शिक्षा का व्यावसायीकरण कर दिया है और संस्थानों को धन कमाने का साधन बना दिया है। निजी स्कूलों के प्रबंधकों द्वारा छात्रों को तीन गुना दाम पर किताबें तथा स्कूल की वर्दी मुहैया करायी जा रही है। छात्रों व अभिभावकों को एक दुकान से किताबें व वर्दी खरीदने को बाध्य किया जाता है। याचिकाकर्ता की ओर से मुख्य न्यायाधीश से निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग की गयी है।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को कुछ सुझाव दिये गये हैं। कहा गया है कि स्कूल अवकाश के महीनों में फीस नहीं वसूलें। साथ ही बिना बोर्ड की सहमति के पाठ्यक्रम में बदलाव न करें और छात्रों के लिये स्कूल और कॉलेजों में बुक बैंक की स्थापना करें। बुक बैंकों से छात्रों को किताबें मुहैया करायी जायें।

यह भी सुझाव दिया गया है कि छात्रों को स्कूलों में निजी ट्यूशन पढ़ने पर प्रतिबंध लगाये जाये। इन स्कूलों में काम करने वाले अध्यापकों को सरकारी स्कूलों के बराबर वेतन उपलब्ध कराया जाये। साथ ही छात्रों के क्लयाण के लिये स्कूलों में अभिभावक-अध्यापक समिति के गठन करने का सुझाव भी दिया गया है।


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