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अयोध्या कारसेवकों पर नहीं चलवाई गोली, तो गवानी पड़ी कुर्सी

अयोध्या कारसेवकों पर नहीं चलवाई गोली, तो गवानी पड़ी कुर्सी

सुल्तानपुर, 01 अगस्त (हि.स.)। अयोध्या में निहत्थे कारसेवकों पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डीवी राय ने गोली नहीं चलवाई तो, कुर्सी से हाथ धोना पड़ा। जिले में दो बार भाजपा के टिकट से सांसद बने। भगवान श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के शुरू होते ही उनका पूरा परिवार गौरवान्वित है।

अयोध्या कार सेवा के समय वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रहे देवेंद्र बहादुर राय के पुत्र पुनीत राय ने हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत में कहा कि भगवान श्रीराम के प्रति जो आस्था पिताजी की थी वही आस्था हम लोगों की भी है। सन् 1992 की अयोध्या कारसेवा में तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डीवी राय ने निहत्थे कारसेवकों पर गोली नहीं चलवाई तो उन्हें निलंबित कर दिया गया। निलम्बन के बाद कोर्ट में सीबीआई चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई। जिसके कारण वह 6 महीने बाद बहाल हो गए। इसके बाद श्री राय ने तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को इस्तीफा सौंपा। उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया गया। अंततः कोर्ट की शरण लेनी पड़ी, तब जाकर 1996 में इस्तीफा मंजूर हुआ। वेतन एवं पेंशन भी रोक दिया गया था।

मोदी के नेतृत्व में कड़े फैसले से विश्व में बढ़ी पहचान

उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर निर्माण शुरू होने के कारण हम अपने आप को बहुत गौरवान्वित महसूस करते हैं कि पिताजी का योगदान इतिहास के पन्नों में लिख उठा। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार के ऐतिहासिक कार्य को यह देश कभी भूल नहीं सकता है। पूरा विश्व आज भारत की ओर देख रहा है। कुशल नेतृत्व एवं निर्णय लेने की क्षमता ने विश्व में भारत ने अपनी पहचान बना ली है।

सुल्तानपुर से दो बार रहे सांसद

खाकी की वर्दी के 25 साल के सफर के बाद सफेद पोश में समाज की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं विश्व हिंदू परिषद के सहयोग से सुल्तानपुर जिले में दो बार भाजपा से सांसद रहे। पहली बार 1996 में एक लाख 28 हजार वोट से विजयी हुए थे। दूसरी बार 1998 में चुनाव हुआ। उस समय 68 हजार वोट से रीता जोशी बहुगुणा को परास्त कर विजयी हुए थे। जिले के इकलौते ऐसे सांसद हैं, जो दो बार सांसद चुने गए। डीबी राय की मृत्यु 64 वर्ष की अवस्था में 2009 में हो गई। उनके दो पुत्र पुनीत राय एवं सुनीत राय हैं। बड़ी बेटी सुनीता राय शादी के बाद दिल्ली में रहती हैं। पुनीत राय ने पिताजी के समाजसेवा वाले जिले में ही अपना निवास बनाया है।

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