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पक्षियों को हो रही है जलवायु परिवर्तन से तालमेल बिठाने में मुश्किल, अध्ययन में खुलासा- हो रही है भोजन की कमी और ज्यादा पक्षियों की मौत

पक्षियों को हो रही है जलवायु परिवर्तन से तालमेल बिठाने में मुश्किल, अध्ययन में खुलासा- हो रही है भोजन की कमी और ज्यादा पक्षियों की मौत

लंदन। ग्लोबल वार्मिंग के कारण बदलते मौसम में प्राणियों को अपना अस्तित्व बचाने के लिए नई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। गर्म होते ग्रह के अनुकूल ढलना समय के साथ मुमकिन हो सकता है, लेकिन कुछ पक्षियों के लिए जलवायु परिवर्तन के अनुसार केवल अपने जीवन चक्र में ही बदलाव करना कई तरह के खतरे पैदा कर रहा है। मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल बिहेवियर और कॉर्नेल यूनिवर्सिटी का यह अध्ययन हाल ही में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन में पाया गया है कि जो पक्षी वसंत के मौसम की शुरुआत में प्रजनन करते थे, उन्हें जलवायु परिवर्तन के कारण खाने में कमी और खराब मृत्यु दर तक का सामाना करना पड़ रहा है। टीम ने न्यूयॉर्क के इथाचा में छोटे पेड़ों की जनसंख्या का अध्ययन किया जो एक तीस सालों के प्रयोग का विषय था। इसमें यहां की जीवों का प्रजनन, कीटों की प्रचुरता और मौसमी हालातों का अध्ययन करना शामिल था। इस तरह के लंबी अवधि वाले अध्ययन प्रजातियों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को जानने के लिए बहुत अहम होते हैं।

इस शोध के प्रमुख लेखक मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के रियान शिपले का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के पहले के समय के बारे में जानना बिना जोखिम का काम नहीं है। हाल के अध्ययनों में इस बात की चिंता जताई गई है कि क्या प्रजातियां जलवायु परिवर्तन के अनुसार वाकई खुद को ढाल सकती भी हैं या नहीं। इनमें खास तौर पर समय के अनुसार विस्थापन और प्रजनन जैसे चक्र बहुत प्रभावित होते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अब मौसम बदलने से पहले प्रजनन के प्रयास करना जानवरों के लिए ज्यादा जोखिम भरा है। उन्होंने पाया कि छोटे पेड़ों के इलाकों में पिछले तीस सालों में प्रजनन तीन दिन प्रति दशक बढ़ गया है। समय से पहले प्रजनन करना उसमें उनके भोजन की उपलब्धता कम होने से भी प्रभावित हो रहा है।

शोध में पाया गया कि जलवायु परिवर्तन के कारण पक्षियों के प्रजनन की दर में बदलाव से उनकी हालत पर गहरा असर हुआ है। इससे यह भी पता चलता है कि उड़ने वाले कीट पतंगों को खाने वाले पक्षियों की संख्या उत्तरी अमेरिका और यूरोप में क्यों कम हो रही है। शिपले का कहना है कि कीट पतंगों को खाने वाली पक्षियों के लिए एक दिन दावत होती है तो एक दिन सूखा। लेकिन असामान्य रूप से गर्म वसंत पक्षियों को हालात का आंकलन करने में गड़बड़ करवा देते हैं। उन्हें तीन सप्ताह पहले ही लगने लगता है हालात बदलकर अच्छे हो गए हैं और प्रजनन का समय आ गया है।

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